Saturday, December 18, 2010

आँखों ने कुछ सपने देखे ,कदम बढे सच करने को ||

आँखों  ने कुछ सपने देखे
कदम बढे सच करने को
सतत इन्द्रियां कहती रहती
बढ़ने को ,कभी रुकने को
असमंजस के चक्र व्यूह हैं
मिले रास्ते धुंधले से ,
एकाकी बढ़ता जाता हूँ
नित्य  ,नया कुछ करने को |||

2 comments:

  1. aage wahi badhte hain jo sapne dekhte hain..
    'ekla chalo re'...
    achchhi rachna..sunder bhav.

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  2. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
    माफियाओं के चंगुल में ब्लागिंग

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