Monday, December 13, 2010

बेरोजगार

जब देखता हूँ तुम्हारा दर्द ,तुम्हारी परेशानियाँ ,
मेरी आँखे भर आती हैं  माँ !
चाहता हूँ मिटा दूं सारा दर्द ,
ले लूँ तुम्हारे सारे गम ,
पर ले नहीं पाता बस देखता हूँ और घुटता हूँ रात दिन !
कोसता हूँ अपने आप को क्यों नहीं करता कुछ माँ के लिए ,
कभी कभी सोचता हूँ कि ये सर काट के तुम्हारे कदमों में रख दूं ,
पर जानता हूँ इस से तुम्हारा  दर्द और बढ़ जाएगा !
जिन आँखों में कभी सपने थे ,
आज सिर्फ आश है बुझी हुई कि शायद इन बूढ़े कंधो को बेटा सहारा दे दे , आज , कल या परसों !
पढ़ा लिखा सब कुछ किया ,
पर इस से बढ़ कर भी कुछ चाहिए समाज को ,
जाति,धर्म ,जिनसे आज थोड़ा नीचे हो गया है कर्म !
लाचार हूँ ,क्या करुं,बेकार हूँ ,
माँ बाप के सपनों को शायद ही पूरा कर सकूं ,बेरोजगार हूँ !!!   

4 comments:

  1. marmik post...
    asha hi jeevan hai...
    nirash na ho , karm karte rahen,safalta jaroor milegi..

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  2. karuna se bharpoor ek sachchi kavita.

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  3. मन की सच्ची अभिव्यक्ति दिल को मर्माहत कर गयी। मेरे पोस्ट पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  4. ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. जो धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.
    इस ब्लॉग पर आने से हिंदुत्व का विरोध करने वाले कट्टर मुसलमान और धर्मनिरपेक्ष { कायर} हिन्दू भी परहेज करे.
    समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य दे
    देशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच - हल्ला बोल
    हल्ला बोल के नियम व् शर्तें

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